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    September 11

    भारतीय सिनेमा का आरंभ

    भारत में पिछले एक सौ सालों से चलचित्रों का निर्माण होता चला आ रहा है. तथा भारतीय सिनेमा ने अपने सौ वर्षों की यात्रा सफलता पूर्वक संपन्न किया है. आइये हम यह जानने का प्रयास करें कि इस सफर की शुरुवात कैसे हुई और इसके कौन कौन से पड़ाव रहे.

    सात जुलाई अठारह सौ छियासी भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अमर दिन है उस रोज मुंबई (पूर्व नाम बंबई) के वाटकिंस हॉटल में ल्युमेरे ब्रदर्स ने छः लघु चलचित्रों का प्रदर्शन किया था. इन छोटी-छोटी फिल्मों ने ध्वनिविहीन होने बावजूद भी दर्शकों का मनोरंजन किया था.

    इन लघु चलचित्रों से प्रभावित होकर श्री एच.एस. भटवडेकर और श्री हीरालाल सेन नामक व्यक्तियों ने ल्युमेरे ब्रदर्स की तरह क्रमशः मुंबई (पूर्व नाम बंबई) और कोलकाता (पूर्व नाम कलकत्ता) में लघु चलचित्रों का निर्माण प्रारंभ कर दिया. सन् 1899 मे श्री भटवडेकर ने भारत के प्रथम लघु चलचित्र बनाने में सफलता प्राप्त की.

    दादा साहेब फालके ने अपने लंदन प्रवास के दौरान ईसा मसीह के जीवन पर आधारित एक चलचित्र देखा वह फिल्म ल्युमेरे ब्रदर्स की फिल्मों की तरह लघु चलचित्र न होकर लंबी फिल्म थी. उस फिल्म को देख कर दादा साहेब फालके के मन में पौराणिक कथाओं पर आधारित चलचित्रों के निर्माण करने की प्रबल इच्छा जागृत हुई. स्वदेश आकर उन्होंने राजा हरिश्चंद्र बनाई जो कि भारत की पहली लंबी फिल्म थी और सन् 1913 में प्रदर्शित हुई. उस चलचित्र ने (ध्वनिविहीन होने के बावजूद भी) लोगों का भरपूर मनोरंजन किया और दर्शकों ने उसकी खूब तारीफ की.

    तो यह थी भारत में चलचित्र निर्माण की शुरवात.

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    September 10

    भारतीय सिनेमा

    भारतीय सिनेमा जिसे कि 'बॉलीवुड' के नाम से भी जाना जाता है विश्व के सबसे बड़े चलचित्र उद्योगों में से एक है| 1913 में प्रथम भारतीय चलचित्र "राजा हरिश्चंद्र" के निर्माण के बाद से भारतीय सिनेमा ने प्रगति के रास्ते में कदम रखा और उसके बाद मुड़ कर कभी पीछे नहीं देखा| "राजा हरिश्चंद्र" का निर्माण करके दादा साहब फालके भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो गये| आज भारतीय भाषाओं में प्रतिवर्ष हजारों चलचित्रों का निर्माण होता है, जिनमें से अधिकतम हिंदी भाषा के होते हैं|

    आरंभ में मूक फिल्मों का ही निर्माण होता था परंतु 1930-31 में फिल्मों में ध्वनि का समावेश करने के तकनीक का विकास हो जाने से सवाक् (बोलती) फिल्मों का निर्माण होने लगा| "आलमआरा" प्रथम भारतीय बोलती फिल्म थी| फिल्मों में ध्वनि के संमिश्रण के परिणामस्वरूप चलचित्र निर्माण में संगीत का प्रयोग होना आरंभ हुआ और इस प्रयोग ने कथावस्तु की अभिव्यक्ति का असाधारण रूप से सशक्त कर दिया| फिल्मों में नृत्य तथा गीत का भी प्रयोग होने के कारण फिल्में अधिक मनोरंजक हो गईं| इस तरह फिल्मों का प्रचलन उत्तरोत्तर लोकप्रिय होता गया|

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