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August 24 रामकथा कैसी विडंबना है कि हमारे देश के आज का युवा वर्ग "रामायण" को 'रामानंद सागर' के नाम से जानता है जब कि उसे 'महर्षि वाल्मीकि' एवं 'संत तुलसीदास' के नाम से जानना चाहिये, वैसे ही "महाभारत" को 'बी.आर. चोपड़ा' के नाम से जानता है जब कि उसे 'महर्षि वेद व्यास' के नाम से जानना चाहिये. मेरा मंतव्य यह नहीं है कि 'रामानंद सागर' और 'बी.आर. चोपड़ा' को नहीं जानना चाहिये, अवश्य ही उन्हेँ भी जानना आवश्यक है क्योंकि "रामायण" और "महाभारत" जैसे महान टी.व्ही. सीरियल बनाने का श्रेय प्राप्त होने के कारण उनका नाम भी भी हिंदू संस्कृति के इतिहास में अमर हो चुका है. परंतु मैं यह कहना चाहता हूँ कि 'महर्षि वेद व्यास', 'ऋषि वाल्मीकि ' और 'संत तुलसीदास' के नाम को कदापि नहीं भुलाया जाना चाहिये. उनका नाम अमर था, अमर है और अमर रहेगा. हाँ यह अवश्य है कि, जैसे बादल के पीछे आने के कारण चंद्रमा कुछ समय के लिये छुप जाता है, उनका नाम भी कुछ समय के लिये विलुप्तप्राय सा हो गया है. पूरा लेख पढ़ने के लिये क्लिक कीजिये.August 21 शून्य के विषय में विश्व को कैसे ज्ञात हुआ.कल्पना कीजिये यदि शून्य के बिना क्या आप गणितीय गणना कर सकते हैं! जी हाँ, कर तो सकते हैं पर उसकी विधि अवश्य ही अत्यंत दुरूह होगी. परंतु कई हजार वर्ष बिना शून्य के बीते हैं. लोगों को यह तो ज्ञात होता था कि उनके पास कुछ नहीं है पर इस कुछ नहीं के लिये उनके पास कोई गणितीय संकेत नहीं था. |
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